एक सपना आत्म निर्भर बनने का!

Equality

आज के इस दौर में हर व्यक्ति सरकारी नौकरी की चाह रखता हैं। लेकिन आजकल सरकारी नौकरी को पाना बहुत कठिन हो गया है। आज के इस युग में लड़कियां भी लड़को के समान अच्छी नौकरी कर, आत्मनिर्भर बनना चाहती है। लेकिन आत्मनिर्भर बनने के लिए उन्हें बहुत सारी समस्याओ का सामना करना पड़ता है।  

सुशीला ऐसी ही एक लड़की हैं। उसका बचपन से एक ही सपना है - कलेक्टर बनना। कलेक्टर बनने के लिए उसने लिए उसने कड़ा परिश्रम किया। दिन रात पढ़ाई की, कोचिंग गई, हर बार पी. एस. सी. परीक्षा दी। पहली बार असफल हुई। दूसरी बार पी. एस. सी. प्रारम्भिक परीक्षा पास की। लेकिन पी. एस. सी. मुख्य परीक्षा  में असफल हो गयी। तीसरी बार फिर मेहनत की। इस बार पी. एस. सी. मुख्य परीक्षा भी पास करके साक्षात्कार (इंटरव्यू) तक गयी। उसे लगा की अब तो उसका सपना पूरा हो ही जायेगा। लेकिन आज कल के इस दौर में प्रतियोगिता का स्तर इतना बढ़ गया है कि, व्यक्ति एक अंक से रह जाता है। इस बार फिर सुशीला को असफलता प्राप्त होती हैं। वह निराश हो जाती है, लेकिन फिर खुद को समझाती है। विचार करती है आखिर मेरी मेहनत में कमी कहाँ आई। गिर कर सम्भलना बहुत मुश्किल होता हैं, पर सुशीला फिर भी खुद को संभालती हैं। एक बार फिर पूरी लगन से मेहनत करने में जुट जाती हैं। तभी उसके सामने एक और मुश्किल आ जाती है। लोग उसकी आलोचना करने लग जाते है। उसे कहते है कि अब तुम रहने दो। तुम नहीं कर पाओगी। तुम्हारी शादी की उम्र हो गई हैं, एक काम करो किसी कलेक्टर से ही शादी कर लो ।

यहाँ तक की उसके माता पिता भी शादी के लिए दबाव डालते है। पर सुशीला कहती है - मैं अपना सपना पूरा कर के ही रहुंगी। एक बार फिर वह पूरी लगन के साथ मेहनत करने में जुट जाती है। परीक्षा के तीनो स्तर को पास करने के लिए वह जी - जान से मेहनत करती है। और जब इस बार जब पी. एस. सी. का परिणाम आता है तो उसकी आंखो में आंसू आ जाते है, वह खुशी से झुम उठती हैं। क्योकि उसकी मेहनत रंग लाती है। उसका सपना पूरा हो जाता हैं। वह कलेक्टर बन जाती है। 

दोस्तों लड़कियाँ अनमोल हैं। अगर वह आत्म निर्भर बनना चाहती हैं, तो इसमें बुरा क्या हैं? क्यों लोग उन पर इतनी उँगलियाँ उठाते है?
क्यों उनकी आयु उनकी पढ़ाई या नौकरी में बांधा उत्पन्न करती हैं?
क्यों उन्हें समानता का अधिकार नहीं दिया जाता है?
क्यों उन्हे लड़को से कम आँका जाता है?
क्यों उनके नौकरी करने से लोगो को समस्या होती है?
क्यों लड़कियों को पैदा होते ही मार दिया जाता है?
यह सवाल अपने आप से पूछिये और अपने नजरिये को थोड़ा बदल के देखिये। 

क्योंकि जो कार्य एक लड़का कर सकता है वह सारे कार्य लड़कियाँ भी कर सकती है। जिस प्रकार सुशीला ने अपने सपनो को पूरा किया, उसी तरह अन्य लड़कियां भी  अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकती है। हमे उन्हें बस एक मौका देना है, फिर देखना एक लड़की कितनी ऊँची उड़ान उड़ती है।

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