सच्ची मानवता

संसार में हर व्यक्ति सर्वप्रथम सिर्फ अपने बारे में ही सोचता है। अपने बाद वह अपने परिवार, दोस्त, समाज इत्यादि के बारे में विचार करता है। आज के इस दौर में मनुष्य समाज, जाति, धर्म, वर्ग, रंग-रूप एवम प्रान्तों के आधार पर बंट गया है। स्वार्थ की भावना मनुष्य में इस कदर घर कर गई है कि मनुष्य सिर्फ अपने ही बारे में सोचता रहता है किसी और की उसे कुछ फिकर ही नहीं रहती है। मुखबधिर जानवर तो छोड़ो उसे इंसानों तक की परवाह नहीं है। वक्त के साथ साथ मानव की संवेदनाये एवम भावनाएं भी बदलती जा रही है। समाज, जाति, वर्ग, रंग-रूप एवम धर्म के बंधन में मनुष्य इस तरह से लिप्त हो गया है कि वह अपने वास्तविक धर्म- मानवता को पुर्णतः भूल चूका है। आज मनुष्य किसी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करने में भी हज़ार बार सोचता है और जितना हो सके उतना किसी की सहायता करने से बचता है। मगर रफ़्तार भरी इस दुनिया में कई लोग ऐसे भी है जो अन्य जीवों के बारे में भी विचार करते है और उन्हें अपने जीवन में प्राथमिकता देते है। और ऐसे ही लोगों के कारण आज भी इंसानियत जिन्दा है।
कुछ दिनों पहले सुबह मैं जब ऑफिस जा रहा था तो मैंने देखा की एक लड़की मेरे आगे-आगे चल रही थी। उसकी वेशभूषा एवम चेहरे से लड़की बहुत ही अच्छी और खुबसूरत लग रही थी। वह लड़की बड़ी ही जल्दी में थी शायद कॉलेज जाने में उसे थोड़ी देर हो गई थी। थोड़ी आगे जाने के बाद मैंने देखा की सड़क के बीचों-बीच एक कुत्ते का पिल्ला फंस गया है और सड़क पार नहीं कर पा रहा है। सड़क पर यातायात इतना अधिक था कि मुझे लगा अब वह पिल्ला किसी वाहन के नीचे आकर दब ही जाएगा। बारिश एवम कीचड़ की वजह  से वह पिल्ला बिलकुल गिला और गन्दा हो चुका था। मेरे कुछ अधिक सोचने या प्रतिक्रिया करने के पहले ही वह लड़की ने जल्दी से जाकर उस पिल्लै को अपनी गोद में उठा लिया और सड़क पार कर उस पिल्लै को सड़क किनारे सुरक्षित पहुँचा दिया। उसने एक पल भी नहीं सोचा कि उसके साफ़ कपडे गंदे हो जायेंगे, उसने बस उस ज़रूरतमंद पिल्लै की मदद की। उस लड़की ने अपने कार्य के द्वारा वहां उपस्थित कई लोगों एक सबक देकर चली गई। उन लोगों में से एक मैं भी था। अक्सर हमारे जीवन में इस प्रकार कि परिस्थिति आती है जब किसी व्यक्ति को हमारी आवश्यकता होती है और हम उसकी मदद करने के बजाय सोच विचार करने में अपना समय गवा देते है और किसी की मदद नहीं करते है। हमारी यही परेशानी है कि हम सही काम करने से पहले हज़ार बार सोचते है और गलत कार्य करने से पहले ज़रा भी विचार नहीं करते। इसीलिए हम जीवन में सुखी कम और दुखी ज्यादा होते है।
क्या ईश्वर ने ये सब समाज, जाति, धर्म, वर्ग को बनाया? ईश्वर ने केवल मनुष्य को बनाया और मनुष्य ने क्या किया? उसने मानव को समाज, जाति, धर्म, वर्ग, रंग-रूप एवम प्रान्तों के आधार पर बाँट कर रख दिया। अपनी दिनचर्या और व्यस्त जीवन में से भी उस लड़की ने ज़रूरतमंद की सहायता के लिए समय निकला और एक जीव के जीवन की रक्षा की। साथ ही वह लड़की अन्य लोगों के लिए एक सबब भी बन गयी। हमें बस इतना ही करना है कि जब किसी को हमारी मदद की आवश्यकता हो तो हमें उसकी मदद करने से पीछे नहीं हटना चाहिए। मानवता सर्वोपरि है और हमें इस गुण को अपने जीवन में लागू करने के साथ साथ अपनी आदतों में भी शामिल करना चाहिए।

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