जीवनदायी रक्त....

"अभी तक कृत्रिम खून नहीं बनाया जा सका है, ये सिर्फ भगवान की देन है।" 

जीवन के जटिल रसायन विज्ञान में रक्त अद्वितीय है। रक्त हमारे शरीर के प्रमुख घटकों में से एक है। दुनिया से सभी लोगों के रक्त का रंग लाल ही है। रक्त ही है जो मानवता को एक सूत्र में जोड़ता है। क्योंकि जब भी किसी व्यक्ति को रक्त की ज़रूरत पड़ती है तो वह यह नहीं पूछता है कि यह रक्त किस मज़हब का है। रक्त को देखकर ये कोई नहीं बता सकता है कि यह रक्त किस धर्म के व्यक्ति का है। एक व्यक्ति के रक्तदान से कई लोगो को इसका फायदा पहुंचाया जा सकता है। रक्त किसी व्यक्ति के जीवन के लिए कितना ज़रूरी है इस बात का अहसास हमें तब होता है जब हमारा कोई अपना खून के लिए जिंदगी और मौत के बीच जूझता है। तब हमें एहसास होता है कि रक्त जीवन के लिए कितना ज़रूरी है। 

भारत में हर तीन सेकेंड में किसी न किसी को खून की आवश्यकता होती है। हर दिन दुनिया में 40,000 यूनिट खून की ज़रूरत पड़ती है। हर 3 में से 1 व्यक्ति को जीवन में खून की आवश्यकता पड़ती है। खून की कमी के कारण भारत में ही हर साल हजारों लोगों की जानें चली जाती हैं। 

देशभर में रक्तदान हेतु नाको, रेडक्रास जैसी कई संस्थाएँ लोगों में रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास कर रही है ,परंतु इनके प्रयास तभी सार्थक होंगे, जब हम स्वयं रक्तदान करने के लिए आगे आएँगे और अपने मित्रों व रिश्तेदारों को भी इस हेतु आगे आने के लिए प्रेरित करेंगे। रक्तदान करने से किसी प्रकार की कोई कमजोरी नहीं आती है। और ना ही इसके कोई दुष्परिणाम है। एक स्वस्थ व्यक्ति साल में 4 बार रक्तदान कर सकता है। आप 3 महीने के अंतराल पर एक बार रक्तदान कर सकते हैं। कोई भी स्वस्थ व्यक्ति जिसकी आयु 18 से 65 वर्ष के बीच हो, जिसका वज़न 45 किलोग्राम से अधिक हो तथा जिसके रक्त में हिमोग्लोबिन का प्रतिशत 12 प्रतिशत से अधिक हो। केवल गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं खून नहीं दे सकती है। यदि आप भी दुसरो के लिए कुछ करना चाहते है और आप रक्तदान करने योग्य है तो मैं आपसे विनम्र निवेदन करता हूं की आप भी रक्तदान अवश्य करे। दान के विषय में सन्त मत्ती अध्याय 06 वचन संख्या 3 और 4 में लिखा है -

"जब तुम दान देते हो, तो तुम्हारा बायाँ हाथ यह न जानने पाये कि तुम्हारा दायाँ हाथ क्या कर रहा है। तुम्हारा दान गुप्त रहे और तुम्हारा पिता, जो सब कुछ देखता है, तुम्हें पुरस्कार देगा।"

इसी प्रकार जब आप रक्तदान करेंगे तो आपका दान पूर्णरूप से गुप्त होगा और ईश्वर आपको इसका प्रतिफल प्रदान करेगा। 

रक्त के विषय में, संत योहन 6:53 में प्रभु येसु ने स्पष्ट कहा है - ‘‘यदि तुम मानव पुत्र का मांस नहीं खाओगे और उसका रक्त नहीं पियोगे, तो तुम्हें जीवन प्राप्त नहीं होगा।"  जिस रक्त के द्वारा हमे जीवन मिला है हमे भी उसी रक्त के द्वारा लोगो की मदद करनी चाहिए, रक्तदान के द्वारा! ताकि हमारे रक्तदान से लोगों को एक नया जीवन मिल सके। तो क्यों ना हम भी अपने रक्त को दान सवरूप दें, और रक्तदान के पुनीत कार्य में अपना सहयोग प्रदान कर  लोगों को जीवनदान दें। 

और हाँ! एक और बात -

"रक्तदान करके देखिये, अच्छा लगता है !"

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