कैसा होगा आगे का सफर?

समय के साथ कोरोना का खतरा बढ़ते ही जा रहा है। लगभग 70 दिन के लम्बे लॉकडाउन के बाद जब अनलॉक 1.0 लागू किया गया तब से संक्रमितों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

हमें अब वायरस के साथ जीना सीखना पड़ेगा। साथ ही अनलॉक 1.0 में कोरोना के मरीज भी तेजी से बढ़ रहे है। कई राज्यों में जरुरी सामान की चीज़ों के लिए दुकाने खोल दी गयी। जनजीवन सामान्य करने की कोशिशें लगातार की जा रही है। कुछ दिनों में धार्मिक स्थल, मॉल आदि जगहे भी खुल जायेगी। लेकिन कोरोना वायरस के साथ जीना आसान नहीं होगा। अपनी सुरक्षा का ख्याल रखते हुए हमें कार्य में आगे बढ़ना होगा। हर समय हर जगह पर हर इंसान के साथ पहले जैसा कार्य करना आसान नहीं होगा। लोगों को आपस में सामंजस्य स्थापित करना होगा। सरकार द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करना होगा। क्योंकि सामूहिक सहयोग से ही कोरोना को हराया जा सकता है।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट, फ़ूड कोर्ट, लिफ्ट, रेस्टोरेंट, एवं अन्य जगहों का उपयोग हमें सोच समझकर करना होगा। साथ की शारीरिक दुरी का भी अच्छा खासा ख्याल रखना होगा। सफाई का सबसे अधिक ध्यान रखना होगा। बार बार उपयोग की जाने वाली चीज़ों एवं जगहों को समय समय पर डिसइंफेक्ट करना होगा। साथ ही समय के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर जितनी भी हो सकें उतने बदलाव लाने होंगे। तब जाकर हम कोरोना के साथ जीवन में आगे बढ़ने में सफल होंगे। 

कोरोना के साथ आगे का सफर बहुत ही मुश्किल होने वाला है। हमें हर चीज़ में सावधानी बरतने की आवश्यकता है। तब कहीं जाकर हम दो समय के भोजन का प्रबंध कर पाएंगे।

मगर इस समय हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती कोरोना वायरस से खुद को बचाने की है। क्योंकि जीवन से बढ़कर फिलहाल कुछ भी नहीं है। जीवन को एक रूप में जीना होगा। लोगों से उचित दुरी बनाकर जीवन जीना बहुत मुश्किल होगा मगर जीवन की रक्षा के लिए एवं संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए हमें अपनी दैनिक गतिविधियों में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। ध्यान रहे का सफर बहुत ही खतरनाक है। हमें कदम कदम पर सावधानी बरतने की आवश्यकता है। तब जाकर हम कोरोना के खिलाफ इस युद्ध में जीत हासिल कर पाएंगे।

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