पेड़

वृक्ष हमारे जीवन का कभी न अलग होने वाला हिस्सा है। जो कोई भी उनसे बात करना और सुनना जानता है वह जीवन के बहुत से सच जान सकता है। वे जीवन का सच्चा नियम सिखाते है। वृक्ष हजारों वर्षों का इतिहास अपने अंदर समाए हुए है। जिससे हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

अभी हाल ही में इंदौर में एक कार्यक्रम हुआ था। इंदौर के ‘बदलाव’ नामक गैर सरकारी संगठन ने ‘वार्तालाप’ नाम का कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसमें कई लोग शामिल हुए थे जिसमें कई डॉक्टर भी शामिल हुए। कार्यक्रम में सभी को अपने विचार व्यक्त करने का मौका मिलाl उनमें से एक ने अपने विचार व्यक्त करते हुए यह कहा कि बचपन से ही उनके पिताजी उन्हें पेड़ पौधों की कहानियां सुनाया करते थे। तब से ही उनकी रुचि पेड़ों में बढ़ गयी और उनसे दोस्ती कर बैठे। उन्होंने अपने घर की पूरी छत पर एक बागड़ भी बना रखा है। वह अपने दफ्तर के कार्यों के बाद घंटों तक अलग-अलग पेड़ और पौधों को देखते और उनसे बाते करते रहते है। उन्हें पेड़ पौधों के साथ अपना समय व्यतीत करता पसंद है। बचपन में वह देखते थे कि उनके पिताजी जब कभी बीमार होते तो वो हमेशा पेड़ के नीचे अपनी खटिया लगा कर बैठ जाते थे। उनके पिताजी उनसें हमेशा कहते थे कि जब कभी आपको अच्छा महसूस न हो या आप बीमार महसूस कर रहे हो तब पेड़ पौधे आपको ठीक होने में सहायता करेंगे। वह आपको आंतरिक ख़ुशी और स्वास्थ्य प्रदान करते है। इनसे हमारा अभिन्न रिश्ता है।

जब हम पेड़ पौधों से अलग हो जाते है तब हम बीमार होने लगते है। आपने देखा होगा कि जब भी आप अपने परिवार के किसी भी सदस्य से अलग हो जाते है या दूर चले जाते है, तो आपको अंदर ही अंदर विचलित या बुरा महसूस होता है, आप अवसाद में जाने लगते है। इसी प्रकार प्रकृति भी हमारा परिवार है। इसके साथ रहने में ही हमारे स्वास्थ्य में बढ़ोतरी होती है और यही हमारी खुशियों का परिचायक भी है। जब हम अपने आपको इन पेड़-पौधों से अलग और श्रेष्ट समझने लगते है, तब हम अपनी सेहत और मूल्यों में लाते करते है।

पेड़ बिना कुछ मांगे हमें सब कुछ देते है।

  • वृक्ष, एक माँ की तरह होता है, वह बिना कुछ मांगे आपको सब देता है।
  • अगर ईश्वर को जानना चाहते हो तो उसकी बनाई प्रकृति को जानो, इन पेड़ो को गले लगाओ। समझ लेना तुम ने ईश्वर को गले लगाया है।
  • वृक्ष मृत्यु को सहर्ष स्वीकार करते है। जो जीवन को ईश्वर के नियम से जीता है, मृत्यु आने पर वो निराश या परेशान नहीं होता। 
  • हमें उनके साथ वस्तुओं जैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। वह भी जीवन के वाहक है।
  • आम का पेड़ कभी नहीं चाहता कि उस पर अंगूर लगे। वे कर्म पर विश्वास करते है। एक वृक्ष दूसरे वृक्ष से न तो तुलना करता है न ही दूसरे के जैसा बनना चाहता है।
  • सबसे ख़ास बात उनसे सीखने वाली ये है कि वे हम सबसे जुड़े रहना चाहते हैं और बदले में कुछ पाये बग़ैर देना चाहते हैं पर हम अपनी एक अलग दुनिया में जीते हैं जहां हम अपनी जरूरतों के हिसाब से, फायदे के हिसाब से दूसरों से जुड़ते है। यहां तक कि आजकल हम प्रेम भी जरूरतों के हिसाब से करते है। हमें अपने ज्ञान का प्रयोग कर उनसे जुड़े रहना चाहिए ताकि अगली पीढ़ियों की देखभाल ये वृक्ष करते रहें।

- चार्ल्स सिंगोरिया 

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