पुत्र प्रभु येशु

“एक ही प्रभु ईसा मसीह में हम विश्वास करते हैं।”

 

पुत्र प्रभु येशु

ईसा मसीह हमारे प्रभु हैं। मनुष्य होते हुए भी वे ईश्वर के प्रताप में भाग लेते हैं। ईसा के समय भी लोग उन्हें प्रभु कहकर पुकारते थे (मत्ती ८:२/१४:३०)। जिन्होनें ईसा मसीह को पहचाना और उन्हें महसूस किया वे उनको प्रभु कहकर पुकारते है। ईसा के शिष्य थॉमस उन्हें पहचानकर अपने विश्वास कि घोषणा करते है, “मेरे प्रभु मेरे ईश्वर” (योहन २०:२८)। ईसा को प्रभु कहकर पुकारते समय हम यही घोषणा करते हैं कि प्रारंभ से जो शक्ति, आदर और महिमा ईश्वर के थे, ईसा भी उनके योग्य हैं। हम ईसा को तब प्रभु बुला सकते हैं जब हम उनके ईश्वरत्व में विश्वास करते हैं।

 

“जिससे ईसा का नाम सुनकर आकाश पृथ्वी तथा अधोलोक के सब निवासी घुटने टेके” (फ़िलि. २, १०)। इब्रानी भाषा में ईसा शब्द का अर्थ है, ‘ईश्वर बचाता है’ जिससे यह स्पष्ट है कि ईश्वर और उनकी शक्ति और प्रताप पूरा ईसा में प्रविष्ट है। “समस्त संसार में ईसा नाम के सिवाय मनुष्यों को कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया है, जिसके द्वारा उनको मुक्ति मिल सकती है” (प्रेरित ४, १२)। यह नाम सब नामों से बढकर है। ईसा का नाम लेकर हम जो भी ईश्वर से मांगते है वह सब हमे प्राप्त हौंगे। (प्रेरित १६, १६-१८) ईसा नाम ईसाई विश्वास और प्रार्थना के केंद्र बिंदु है।

मसीह का अर्थ है, “अभिषिक्त”। ईश्वर के आत्मा ईसा का अभिषेक करते है ताकि जिस कार्य के लिए ईसा मनुष्य बने वह सफलतापूर्वक संपन्न हो जाये। ईसा का मिशन था, पाप में पड़े हुए लोगों को बचाना; उनमें प्रविष्ट आत्मा को उन लोगों ने भी पहचाना जो उनके सम्पर्कं में थे। संत पेत्रुस ईसा को सही रूप से पहचानते हुए कहते हैं, “आप मसीह है” (मरकूस ८,२९)।

“वह ईश्वर का एकलौता पुत्र और सारी सृष्टि का पहलौठा हैं ।”

 

ईश्वर का पुत्र

बाइबिल के पुराने विधान के अनुसार, ईश्वर के द्वारा चुने हुए लोगों को भी ईश्वर के पुत्र ही कहते हैं। ईश्वर ने स्वयं अपने पुत्र ईसा मसीह कि पुष्टि की जब उन्होंने ईसा के बप्तिस्मा के वक्त कहा, “यह मेरा प्रिय पुत्र है। मैं इसपर अत्यन्त प्रसन्न हूँ” (मत्ती ३,१७)। इन्हीं शब्दों को ईसा के रूपान्तरण के समय भी ईश्वर द्वारा दोहराया जाता है (मत्ती १७,५)। ईसा भी खुद को ईश्वर का एकलौता पुत्र कहते हैं (योहन ३,१६)। इस बात का स्पष्टीकरण उन्होंने अपने जीवन और कर्मो द्वारा दिया। आज हम जो घोषणा करते हैं, ‘वह ईश्वर का एकलौता पुत्र...’, कलवारी पर सूली के निचे खड़े शतपति ने ईसा को मरते हुए देखकर कहा, “निश्चय ही, यह मनुष्य ईश्वर का पुत्र था” (मरकूस १५,३९)। आज भी कलीसिया ईसा मसीह को ईश्वर के पुत्र मानती है और ऐसा ही सिखाती है। ईश्वर के पुत्र होने के कारण वे, ईश्वर ने जिनकी सृष्टि की, उन सभी का पहलौठा हैं।

“वह सभी युगों के पहले पिता से उत्पन्न हुआ है, बनाया हुआ नहीं हैं।”

“वह आदि में ईश्वर के साथ था” (योहन १,२)। ईसा मसीह पहले ही ईश्वर था, उसके बाद ही वह मनुष्य बना। ईश्वर होने के नाते वह सब सृष्टियों से पहले विध्यमान था। ईश्वर पुत्र होने का अर्थ यह है कि वह ईश्वर के द्वारा ही उत्पन्न हुआ। दुनिया कि सृष्टि ईश्वर ने की, दुनिया में जितने भी प्राणी हैं, पशु-पक्षी, यहाँ तक कि मनुष्य भी, सब के सब ईश्वर की सृष्टि है, ईश्वर कि रचना है। लेकिन ईसा न तो एक प्राणी मात्र थे, न मनुष्य मात्र, बल्कि ईसा मसीह स्वयं ईश्वर के पुत्र थे, इसलिए वे एक सृष्टि नहीं हैं। उनकी सृष्टि नही कि गयी बल्कि वे पिता के साथ अनन्त कल से विद्यमान हैं।

“वह सच्चे ईश्वर से उत्पन्न सच्चा ईश्वर और पिता के साथ एक तत्व है ।”

ईसा मसीह सच्चे ईश्वर से उत्पन्न हैं, इसलिए सच्चे ईश्वर से उत्पन्न ईसा मसीह भी सच्चा है। ‘ईसा ईश्वर से उत्पन्न है।’ इसका यह मतलब भी है कि जो भी गुण हम ईश्वर से पायेंगे वे सब हम ईसा में भी पायेंगे। इसलिए हम धर्मसार में यह दोहराकर हमारा विश्वास प्रकट करते हैं। ईसा मसीह जो सच्चे ईश्वर से उत्पन्न सच्चा ईश्वर है, उसमें हम विश्वास करते हैं। मनुष्य कि सृष्टि के बारे में ईश्वर कहते हैं, “हम मनुष्य को अपना प्रतिरूप बनायें, वह हमारे सदृश्य हो” (उत्पत्ति १,२६)। अगर ईश्वर एक निरे मनुष्य की सृष्टि अपने ही प्रतिरूप और सदृश्य में करेंगे तो कितने अधिक सदृश्य और छाया से वह अपने एकलौते बेटे ईसा मसीह को उत्पन्न किया होगा। मनुष्य का पुत्र ही हो सकता है तो ईश्वर का पुत्र और कुछ हो नहीं सकता। अगर मनुष्य के पुत्र अपने पिता जैसे मांस और लहू का बना हुआ है तो ईश्वर का पुत्र भी अपने पिता के तत्व में एक है। पिता ईश्वर जिस तत्व का बना हुआ है, पुत्र ईसा भी उसी तत्व का बना हुआ है।

“उसी के द्वारा सारा विश्व रचा गया है, और सब कुछ बनाया गया है।”

“आदि में शब्द था, शब्द ईश्वर के साथ था और शब्द ईश्वर था वह आदि में ईश्वर के साथ था। उसके द्वारा सबकुछ उत्पन्न हुआ और उसके बिना कुछ भी उत्पन्न नहीं हुआ” (योहन १:१-३)। ईसा को, अथवा पवित्र त्रित्व के दुसरे व्यक्ति को इसाई लोग ‘शब्द’ कहकर भी पुकारते हैं। “शब्द ने शारीर धारण कर हमारे बिच निवास किया” (योहन १,१४)। इसी शब्द के द्वारा ईश्वर आदि में इस दुनिया की सृष्टि की। “ईश्वर ने कहा...” (उत्पत्ति १,३/१,६/१,९/१,१४)। ईश्वर के वचन या शब्द मात्र से ही इस दुनिया की सृष्टि हुई। इसी कारण हम कहते हैं कि ईसा के द्वारा सारा विश्व रचा गया और सब कुछ बनाया गया। यह बात इसका स्पष्टीकरण है कि ईसा आदि से ही ईश्वर के साथ विधमान थे।

- चार्ल्स सिंगोरिया

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