पिता ईश्वर

“एक ही सर्वशक्तिमान पिता ईश्वर में हम विश्वास करते है.”

संसार में बहुत ही कम ऐसे लोग होंगे जो ईश्वर पर विश्वास नही करते। आप मैं और जो भी व्यक्ति अपने ही जीवन में विश्वास रखता है वह जरूर उस ईश्वर पर भी विश्वास रखता है जिन्होनें उसे यह जीवन प्रदान किया। हर विश्वासी के लिए ईश्वर सबसे बड़ा है और उसके जीवन में प्रथम स्थान ईश्वर को ही मिलता है। इस ईश्वर को कोई अल्लाह कहकर पुकारता है, कोई राम या कृष्ण कहकर पुकारता है और कोई पिता कहकर पुकारता है। कोई इसे सृष्टिकर्ता कहता है तो और कोई कहता है कि ईश्वर, सृष्टिकर्ता ही नहीं बल्कि पालनहार और विनाशक भी है।

ईश्वर सबका आदि और अनन्त है। हम उस ईश्वर में विश्वास करते हैं जो एक है। जब हम हमारे विश्वास कि घोषणा यह कहकर करते हैं, “एक ही...” हम यह घोषणा करते हैं, ईश्वर एक है, वह एकमात्र है। हम यह स्वीकार करते हैं कि एक ही ईश्वर है। बाइबिल के पुराने विधान में ईश्वर इस्राएलियों को अपने आपको प्रकट करते हुए कहता है कि वही उनका एकमात्र ईश्वर है। “इस्राएल सुनो, हमारा प्रभु ईश्वर एकमात्र प्रभु है” (विधी ६:४)। ईसा मसीह भी इसका समर्थन करते हैं जब वे कहते है, “तुम्हारा प्रभु ईश्वर एकमात्र प्रभु है” (मारकुस १२:२९)। एक ही ईश्वर में विश्वास करने का मतलब हैः

  • ईश्वर की महानता और प्रताप को समझना।
  • शुक्रगुजारी में जीना।
  • सब मानवों कि एकता और सही प्रतिष्ठा को जानना।
  • हर हालत में ईश्वर पर भरोसा रखना।

हम सर्वशक्तिमान ईश्वर में विश्वास करते हैं। ईश्वर के सब गुणों मे यही एकमात्र गुण है जो धर्मसार में हम पाते हैं। हम ईश्वर को सर्वशक्तिमान इसलिए कहते है क्युकी उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है। जब हम उसे सर्वशक्तिमान कहकर पुकारते हैं तब हम यही घोषणा करते हैं कि उनकी शक्ति सार्वत्रिक, प्रेममयी और रहस्यमय हैं।

हम पिता ईश्वर में विश्वास करते हैं। कई धर्मो के लोग ईश्वर को ‘पिता’ कहकर पुकारते हैं। वह इसी मायने में पिता है कि उसने संसार कि सृष्टि की। जब हम पिता ईश्वर कहकर पुकारते हैं, हम यह घोषणा करते है कि वह ईश्वर हमारे जीवन का स्रोत है और वह अपनी संतानों के लिए अच्छाई और प्रेम हैं।

“वह दृश्य और अदृश्य सृष्टि का कर्ता है।”

“प्रारंभ में ईश्वर ने स्वर्ग और प्रथ्वी की सृष्टि की।” (उत्पत्ति १:१) पवित्र बाइबिल की शुरुआत इन्ही शब्दों से होती है। जब हम इन शब्दों को धर्मसार में दोहराते हैं तब हम यह घोषणा करते हैं कि ईश्वर जो सर्वशक्तिमान हैं, वह पृथ्वी और स्वर्ग का सृष्टिकर्ता है। बाइबिल मनुष्य की सृष्टि के बारे में सिखाती है कि ईश्वर ने प्रारंभ में संसार के जीव-जंतुओं की सृष्टि करने के बाद. (उत्पत्ति १:१-२५) मनुष्य को अपने प्रतिरूप में बनाया। (उत्पत्ति १:२६) ईश्वर ने उन्हें नर और नारी के रूप में बनाया। (उत्पत्ति १:२७) बाइबिल में ईश्वर को छः दिनों में संसार की सृष्टि करते हुए दर्शाया गया है (उत्पत्ति १:३१)। सृष्टि ईश्वर कि मुक्ति योजना की नीव हैं। यह सृष्टि का आरंभ है जबकि इसकी पूर्ति ईसा मसीह में होती है।

- चार्ल्स सिंगोरिया

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