कनानी स्त्री |

संत मत्ती के अनुसार सुसमाचार 
15:21-28 

ईसा ने वहाँ से बिदा होकर तीरूस और सिदोन प्रान्तों के लिए प्रस्थान किया। उस प्रदेश की एक कनानी स्त्री आयी और पुकार-पुकार कर कहती रही, "प्रभु दाऊद के पुत्र! मुझ पर दया कीजिए। मेरी बेटी एक अपदूत द्वारा बुरी तरह सतायी जा रही है।" ईसा ने उसे उत्तर नहीं दिया। उनके शिष्यों ने पास आ कर उनसे यह निवेदन किया, "उसकी बात मानकर उसे विदा कर दीजिए, क्योंकि वह हमारे पीछे-पीछे चिल्लाती आ रही है"। ईसा ने उत्तर दिया, "मैं केवल इस्राएल के घराने की खोई हुई भेड़ों के पास भेजा गया हूँ। इतने में उस स्त्री ने आ कर ईसा को दण्डवत् किया और कहा, "प्रभु! मेरी सहायता कीजिए"। ईसा ने उत्तर दिया, "बच्चों की रोटी ले कर पिल्लों के सामने डालना ठीक नहीं है"। उसने कहा, "जी हाँ, प्रभु! फिर भी स्वामी की मेज़ से गिरा हुआ चूर पिल्ले खाते ही हैं"। इस पर ईसा ने उत्तर दिया "नारी! तुम्हारा विश्वास महान् है। तुम्हारी इच्छा पूरी हो।" और उसी क्षण उसकी बेटी अच्छी हो गयी।

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