ईसा समुद्र पर चलते हैं

संत मारकुस के अनुसार पवित्र सुसमाचार
6:  45-52

इसके तुरन्त बाद ईसा ने अपने शिष्यों को इसके लिए बाध्य किया कि वे नाव पर चढ़ कर उन से पहले उस पार, बेथसाइदा चले जायें; इतने में वे स्वयं लोगों को विदा कर देंगे। ईसा लोगों को विदा कर पहाड़ी पर प्रार्थना करने गये। सन्ध्या हो गयी थी। नाव समुद्र के बीच में थी और ईसा अकेले स्थल पर थे। ईसा ने देखा कि शिष्य बड़े परिश्रम से नाव खे रहे हैं, क्योंकि वायु प्रतिकूल थी; इसलिए वे रात के लगभग चैथे पहर समुद्र पर चलते हुए उनकी ओर आये और उन से कतरा कर आगे बढ़ना चाहते थे। शिष्यों ने उन्हें समुद्र पर चलते देखा। वे उन्हें प्रेत समझ कर चिल्ला उठे, क्योंकि सब-के-सब उन्हें देख कर घबरा गये। ईसा ने तुरन्त उन से कहा, "ढ़ारस रखो, मैं ही हूँ। डरो मत।" तब वे उनके पास आ कर नाव पर चढ़े और वायु थम गयी। शिष्य आश्चर्यचकित रह गये, क्योंकि वे अपनी बुद्धि की जड़ता के कारण रोटियों के चमत्कार का अर्थ नहीं समझ पाये थे।

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