वंचित लोगों के बीच क्रिसमस का त्योहार

प्रतीकात्मक तस्वीर

पुथुपुनल और संत अल्फोंसा की महिलाओं का दल एवं चंगाई की हमारी माता चर्च, करूमानदापाम, त्रिची की युवतियों ने, तमिलनाडु में करूर जिला स्थित वडेसरी गाँव की महिलाओं के साथ मिलकर क्रिसमस का आयोजन किया।वडेसरी गाँव एक हिन्दू आबादी वाला गाँव है जिसमें अधिकतर महिलाएँ विधवा हैं अपने पतियों द्वारा त्याग दी गयी हैं।इन परिवारों की सलाहकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता लोबीदास ने कहा कि ये महिलाएं खुद अपने परिवार के लिए रोटी जुटाती हैं। ये अपने समान दूसरी महिलाओं की मदद भी करतीं हैं और उन्होंने एक दल बनाया है।कार्यक्रम का उद्देश्य था, उन्हें यह बतलाना कि क्रिसमस प्रेम और बांटने का पर्व है। यह एक ऐसा अवसर है जब लोग अपनी पृथकताओं को भूलकर, अपने आप से बाहर निकलते एवं लोगों की मदद हेतु आगे बढ़ते हैं।महिलाओं की संयोजिका जेसी ने क्रिसमस संदेश में कहा, "2000 वर्षों पहले महादूत गाब्रिएल ने कुँवारी मरियम को संदेश दिया था। उस संदेश को सुनने के तुरन्त बाद मरियम अपनी कुटुम्बनी एलिजाबेथ को मदद करने चल पड़ी थी।"युवाओं एवं महिलाओं ने क्रिसमस का गीत गाकर तथा नृत्य प्रस्तुत कर महौल को अधिक आनन्दमय बनाया। उन्होंने एक-दूसरे के बीच उपहार भेंट की।वडेसरी की महिलाओं ने भी अपनी ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। उसके बाद वे एक-दूसरे के घर जाकर उनके परिवारों से मुलाकात की। फादर के. चार्ल्स ने इनाम वितरण खेल का संचालन किया।संत अल्फोंसा की सदस्य जानेट रूथ ने कहा, "यह मेरे लिए एक खास अनुभव था। ये लोग बेसहारों की तरह जीते हैं किन्तु शिकायत नहीं करते। यद्यपि वे अत्यन्त गरीबी में जीते हैं तथापि उन्होंने खुशी से मेरा स्वागत किया।"मरियम्मा ने कहा, "मैं एक विधवा हूँ और मेरी तीन लड़कियाँ हैं। मैं गाँव के स्व-सहायता समूह में शामिल हूँ। मुझे दूसरों की मदद करते हुए खुशी होती है, विशेषकर, जो मुझसे भी अधिक गरीब हैं।"सिस्टर तेरेसा लिजी ने कहा, "येसु ख्रीस्त का जन्म हम सभी के लिए हुआ है। उन्होंने स्वर्ग राज्य के लिए किसी को वंचित नहीं किया है। हम सभी उनका जन्म दिन मनाने के लिए आमंत्रित हैं।

Add new comment

8 + 0 =

Please wait while the page is loading