लीबिया प्रवासियों के हिरासत केंद्रों को बंद करने की प्रक्रिया में

लीबिया हिरासत केंद्र

लीबिया की सरकार हिरासत केंद्रों को बंद करने पर विचार कर रहा है, जहां हजारों प्रवासियों को रखा जाता है।

संयुक्त राष्ट्र की मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय समझौते की सरकार, जिसे ‘जीएनए’ के रूप में जाना जाता है, पिछले हफ्ते एक हवाई हमले के बाद सभी प्रवासी हिरासत केंद्रों को बंद कर रही है, जिसमें 53 लोग मारे गए थे।

त्रिपोली के एक हिरासत केंद्र में हुए हवाई बमबारी में लगभग 120 शरणार्थी और प्रवासी घायल हो गये। हमले के लिए जनरल खलीफा हैदर की अगुआई वाली लीबिया की राष्ट्रीय सेना को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदारी का सत्यापन नहीं किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र को ऐसी खबर मिली थी कि कुछ शरणार्थियों और प्रवासियों पर निगरानी करने वाले गार्डों ने गोली चलाई क्योंकि वे भागने की कोशिश कर रहे थे।

इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चौंका दिया है और हिरासत में लिए गए केंद्रों में प्रवासियों पर किए गए भयानक अत्यचार और बदसलूकियाँ प्रकाश में आयी। सोमालिया, सूडान, इरिट्रिया, इथियोपिया और अन्य जगहों से 5,000 से अधिक प्रवासियों को देश के दर्जनों हिरासत केंद्रों में बंद कर दिया गया है। लीबिया के समुद्री पुलिस द्वारा अधिकांश कैदियों को यूरोप में भूमध्यसागर पार करने के प्रयास के दौरान गिरफ्तार किया गया था।
अब, काफी दबाव के बाद, यह समझा जा रहा है कि सरकार हिरासत केंद्रों को बंद करने तथा शरणार्थियों और प्रवासियों को रिहा करने की योजना बना रही है।
यूएन का कहना है कि लीबिया में 3,800 से अधिक शरणार्थियों और प्रवासियों को वर्तमान में हो रहे लड़ाई क्षेत्रों में रखा गया था। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि वे उन्हें त्रिपोली के आस-पास के क्षेत्रों से हटाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन 600 लोग अभी भी ताजौरा शिविर में बंद हैं।

इतालवी अधिकारियों द्वारा लम्पेदूसा में प्रवेश से मना कर दिए जाने के बाद, गैर-सरकारी संगठन द्वारा संचालित बचाव जहाज, एलन कुर्दी, वेलेटा के रास्ते में है। जहाज के कप्तान ने कहा कि एक अन्य जहाज लम्पेदूसा बंदरगाह में प्रवेश किया था, परंतु यात्रियों को उतरने की अनुमति नहीं दी गई, इसलिए उसने माल्टा जाने का निर्णय लिया।

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