रोम के केंद्र वाटिकन में इथियोपियाई कलीसिया की उपस्थिति

संत पापा फ्राँसिस

संत पापा फ्रांसिस ने संत पापा बेनेडिक्ट पंद्रहवें द्वारा स्थापित पोंटिफिकल इथियोपियन कॉलेज की शताब्दी वर्ष पर इथियोपिया और इरित्रिया से आए हुए धर्माध्यक्षों, विशिष्ट अधिकारियों और इथियोपियन कॉलेज समुदाय से मुलाकात की।संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित एथियोपिया कॉलेज की सत वर्षीय जुबली समारोह के अवसर पर इथियोपिया और इरित्रिया से आए हुए धर्माध्यक्षों, कार्डिनल बरहनीस और मोनसिग्नोर टेस्फामारीम, कॉलेज के फादर रेक्टर, वहाँ काम करने वाले सभी कर्मचारियों और विद्यार्थी पुरोहितों का अभिवादन किया।

संत पापा ने कहा कि वाटिकन के परिसर में इथियोपियन कॉलेज सौ वर्षों से इथियोपिया की कलीसिया के तीर्थयात्रियों के धर्मशाला रहा है। सदियों से, लोग भौगोलिक रूप से रोम से बहुत दूर हैं, लेकिन उद्धारकर्ता येसु मसीह के प्रेरितों के विश्वास के करीब, प्रेरित संत पेत्रुस की कब्र के पास ही  आपने घर और आतिथ्य पाया है।

रोम में इथियोपिया के लोग
वाटिकन में इथियोपियाई लोगों की कहानी 15 वीं शताब्दी से शुरु होती है, जब संत पापा सिक्सटुस  चौथे ने इथियोपिया के तीर्थयात्रियों को वाटिकन द्यान में सान स्तेफनो देल्ली अबीसीनी (सेंट स्टीफन ऑफ द एबिसिनियंस) गिरजाघर का उपयोग की अनुमति दी थी। 20 वीं शताब्दी में, संत पापा बेनेडिक्ट पंद्रहवें ने पोंटिफ़िकल इथियोपियन कॉलेज की स्थापना की, जिसे संतपापा पियुस ग्यारेहवें  ने बड़ा किया था।

संत पापा ने एथियोपिया के प्रेरित महान भिक्षु टेस्सा सियोन के उन वाक्यों को याद दिलाया जो संत स्थेफनो देल्ली अबीसीनी गिरजाघर,जहाँ वे आज और कल पवित्र मिस्सा समारोह का अनुष्ठान करेंगे, की पट्टिका पर अंकित है, "मैं खुद इथियोपियाई हूँ, मैंने जगह- जगह तीर्थयात्री की...लेकिन, रोम को छोड़कर, कहीं भी मैंने मन और शरीर की शांति नहीं पाया। रोम में मन की शांति क्योंकि मैंने सच्चा विश्वास पाया, शरीर की शांति, क्योंकि मुझे वहां पेत्रुस के उत्तराधिकारी मिला जिसने हमारी आवश्यकताओं में हमें मदद की।”

भिक्षु टेस्सा सियोन अपने ज्ञान से रोमन क्यूरी को समृद्ध किया और इथियोपियाई भाषा में नए नियम की छपाई का निरीक्षण किया।

दो कलीसिया, एक परंपरा
संत पापा ने वहाँ उपस्थित इथियोपिया और एरीत्रिया के विद्यार्थी पुरोहितों को संबोधित करते हुए कहा कि इथियोपिया और इरित्रिया की एक ही परंपरा की दो कलीसियाओं से, प्राचीन परंपराओं के साथ आप हमारे बीच अपनी भूमि के इतिहास की समृद्धि लाते हैं, जहाँ आप इस्लाम और यहूदी धर्म को मानने वालों के साथ मिलकर रहते हैं। संत पापा ने इथियोपिया तेवाहेदो ऑर्थोडेक्स कलीसिया को भी याद किया जिनके प्राधिधर्माध्यक्ष मथियास के साथ वाटिकन में मुलाकात हुई थी।   

शांति के निर्माता
संत पापा ने कहा,“आपसे मिलने के बाद, मैं इथियोपिया और इरीट्रिया के अपने कई भाइयों और बहनों के बारे में सोचता हूँ, जो युद्ध के कारण भयानक गरीबी की जीवन जी रहे हैं। कुछ महीनों पहले युद्ध समाप्त हुआ है। संत पापा ने युद्ध समाप्ति के लिए ईश्वर और उन लोगों को धन्यवाद दिया जिन्होंने शांति के लिए काम किया है। मैं हमेशा प्रार्थना करता हूं कि हम दोनों पक्षों द्वारा अनुभव किए गए वर्षों को दर्द के संजोएंगे और हम अब जातीय समूहों और देशों के बीच विभाजन में नहीं पड़ेंगे। आप पुरोहित हैं, आप हमेशा अच्छे संबंधों, शांति के निर्माता बनें। ईश्वर के इस उपहार को आप अपने पल्लीवासियों के बीच साझा करें। सुलह के मार्ग आंतरिक और बाहरी घावों का इलाज करेगा, जो कि आपके देश के बच्चों और युवा लोगों के भविष्य को सफल बनायेगा।

प्रवासन
संत पापा ने उन लोगों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना प्रकट की जो युद्ध के दौरान अपने देश को छोड़, सुरक्षित स्थानों की खोज में जंगलों और समूद्रों में त्रासदियों के शिकार हो गये हैं। जो बचकर निकल गये वे यूरोप के देशों में हैं और आप में से कुध उनकी आध्यात्मिक देखभाल करते हैं। बहुत कुछ अभी भी किया जा सकता है। रोम में रहकर अध्ययन करना एक विनम्र और उदार सेवा है। अपने ज्ञान का  उपयोग आप अपने द्श और विदेश में लोगों के विश्वास बढ़ाने और प्रभु से जुड़े रहने के लिए करें।

अंत में संत पापा ने एरीत्रिया और एथियोपिया की कलीसिया को शांति की महारानी माता मरियम के सिपुर्द किया।

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