भारतीय धर्माध्यक्ष ने महिलाओं के खिलाफ हो रहीं हिंसा पर दुख व्यक्त किया

प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत में हर दिन किसी न किसी महिला के साथ बलात्कार होता है। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों ने देश को हिला दिया है। शायद ही ऐसा कोई दिन होता है, जब अखबार में बलात्कार की घटनाएं न छपती हों। भारतीय कलीसिया भी"महिलाओं के खिलाफ हो रहीं सभी हिंसाओं के लिए दुःख और शर्म महसूस करती है," लखनऊ (उत्तर प्रदेश) के महाधर्माध्यक्ष जेराल्ड जॉन मतियास ने एशिया न्यूज से बात करते हुए कहा। हाल की कुछ नृशंस घटनाओं ने विशेष तौर पर देश का ध्यान खींचा है। हैदराबाद में एक महिला के साथ चार लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया और बाद में उसे जिंदा जला दिया। उन्नाव में एक दुष्कर्म पीड़िता को जिंदा जला दिया गया। हैदराबाद और उन्नाव की घटना को लेकर जनता बुरी हड़कंप मच गया है।महिलाएं हमें जीवन देती हैं। एक बच्चे को जन्म देने के लिए एक माँ अपने जीवन तक का बलिदान कर सकती है। मुझे इसके लिए आभार की गहरी अनुभूति होती है और मैं हर दिन माँ मरियम से प्रार्थना करता हूँ।” लगभग डेढ़ साल पहले, “रॉयटर्स फाउंडेशन ने भारत को महिलाओं के लिए सबसे खराब देश के रूप में स्थान दिया। सरकार ने इससे इनकार करने की कोशिश की, लेकिन ताजा उन्नाव तथा हैदराबाद की घटना इसका सबूत है।”महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसाओं की बढ़ती संख्या चिंताजनक है। जो लोग इसके विरोध में आवाज उठाते हैं उन्हें भी भय का सामना करना पड़ता है। उनके परिवार और संबंधियों को भी खतरा बना रहता है।महाधर्माध्यक्ष ने कहा "भारतीय कलीसिया महिलाओं के प्रति अवमानना की मानसिकता के खिलाफ काम कर रही है। यह हर जगह महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाना चाहती है। हम अपने धर्मप्रांत में भी करते हैं। हम उन्हें उनकी गरिमा और अधिकारों के बारे में जागरूक करते हैं। हम नहीं चाहते कि व्यापक समाज या स्कूलों में भी उनके साथ भेदभाव हो। हम उन्हें पुरुषों के समान अवसर देते हैं। हम देश में एक छोटे से अल्पसंख्यक हैं, लेकिन मेरा मानना है कि हम जो करते हैं वह महत्वपूर्ण है। ”

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